गुरुवार, 24 मार्च 2011

चुभता टीका

बिना लगाये लगता निशदिन

महंगाई का टीका

इस टीके से होता निशदिन

स्वाद में हर रस फीका

स्वाद में हर रस फीका

अब तो छूटी नान खटाई

सपनों में कालीने केवल

घर में फटी चटाई

घर में फटी छटाई

पर है हाथों में मोबाईल

जेब में पैसें भलें न हों

पर है होंठों पर इश्माइल

है होंठों पर इश्माइल

करते धन पाने की बातें

टीके से बचने की खातिर

भारती हर दिन गिनते रातें

1 टिप्पणी:

अल्पना वर्मा ने कहा…

मंहगाई पर करारी चोट की है.
'जेब में पैसें भलें न हों पर है होंठों पर इश्माइल है होंठों पर इश्माइल करते धन पाने की बातें '
*यही स्थिति हो गयी है अब माध्यम वर्ग की.