दो आतंकी ढेर
दो जवान शहीद
कुल मिला कर
चार घरों में अँधेरा
दो इधर
तो दो घर उधर
जरी है अभी सिलसिला
सरहदों पर
..आमीन..
प्रस्तुतकर्ता संजय भास्कर पर
शुक्रवार, 30 अप्रैल 2010
गुरुवार, 22 अप्रैल 2010
डाकिया
तन पर झोला , मन है भोला
घूम रहा है गली - गली
आओ अपनी चिठ्ठी ले लो
हर द्वार-द्वार पुकार चली
मीठे -मीठे श्वर को सुनकर
मुरझाये चेहरे खिल जाते
यादों में है जिन्हें बसाया
पत्रों में आकर मिल जाते
वर्षा हो या जेष्ठ दुपहरी
तूफां हो या शीत हो गहरी
हर मौसम में नित-दिन आता
बन करके "हर दिल" का प्रहरी
सबसे उसका प्रेम का नाता
नित-दिन नयें संदेशे लाता
हर सुख-दुःख का वह भागी है
हर "दिल" उसका अनुरागी है
घूम रहा है गली - गली
आओ अपनी चिठ्ठी ले लो
हर द्वार-द्वार पुकार चली
मीठे -मीठे श्वर को सुनकर
मुरझाये चेहरे खिल जाते
यादों में है जिन्हें बसाया
पत्रों में आकर मिल जाते
वर्षा हो या जेष्ठ दुपहरी
तूफां हो या शीत हो गहरी
हर मौसम में नित-दिन आता
बन करके "हर दिल" का प्रहरी
सबसे उसका प्रेम का नाता
नित-दिन नयें संदेशे लाता
हर सुख-दुःख का वह भागी है
हर "दिल" उसका अनुरागी है
बुधवार, 14 अप्रैल 2010
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