शुक्रवार, 18 मार्च 2011

नेता बनाम बेटा

आज बदलते युग में
नेता से ज्यादा बेटा बदल रहा है
नेता तो कुर्सी के लिए
जान देने को तत्पर परन्तु
बिल्लो रानी कहे कहे
आज का बेटा जान लेने के लिए
चलता है लेकर लाव-लश्कर

नेता जी को कुर्सी में ही
तीनों लोक नजर आते हैं
परन्तु आज के बेटे तो
जहाँ दिखी ‘‘ऐश’’
वहीं पसर जाते हैं

नेता जी को याद नही
जनतासे किये वादे
पर आज बेटामंजनूबन
पूरे कर रहा हैलैलाके इरादे

1 टिप्पणी:

योगेन्द्र पाल ने कहा…

लिखा तो अच्छा है आपने पर इशारा कौन है? नेता का बेटा या कोई भी बेटा

पाठकों पर अत्याचार ना करें ब्लोगर