आज बदलते युग में
नेता से ज्यादा बेटा बदल रहा है
नेता तो कुर्सी के लिए
जान देने को तत्पर परन्तु
‘बिल्लो रानी’ कहे न कहे
आज का बेटा जान लेने के लिए
चलता है लेकर लाव-लश्कर
नेता जी को कुर्सी में ही
तीनों लोक नजर आते हैं
परन्तु आज के बेटे तो
जहाँ दिखी ‘‘ऐश’’
वहीं पसर जाते हैं
नेता जी को याद नही
‘जनता’ से किये वादे
पर आज बेटा ‘मंजनू’ बन
पूरे कर रहा है ‘लैला’ के इरादे
शिक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल : अनुशासन या अपमान !
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हाल के दिनों में विद्यालय में छात्राओं को “मुर्गा” बनाकर दंड देने की घटना
को लेकर व्यापक चर्चा और विवाद देखने को मिला है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो
सामने ...
7 घंटे पहले

1 टिप्पणी:
लिखा तो अच्छा है आपने पर इशारा कौन है? नेता का बेटा या कोई भी बेटा
पाठकों पर अत्याचार ना करें ब्लोगर
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