मंगलवार, 14 सितंबर 2010

हिंदी दिवस

हिंदी में बोलें और गायें
निशदिन हिंदी दिवस मनाएं
आओ हम खुद को पहचानें
अंग्रेजी संग हुए बेगाने
जिसे बोलते जीभ लचकती
अधरों पर मुस्कान न आये
हिंदी में बोले और गायें
निशदिन हिंदी दिवस मनाएं

हिंदी का आया पखवारा
भागी इंग्लिश देख अखारा
भाव बिखर कर गिरती जाती
हिंदी के सम्मुख टिक न पाती
कर्ण-प्रिय लगती निज भाषा
जन-जन में ये भाव जगाये
हिंदी में बोलें और गायें
निशदिन हिंदी दिवस मनाएं

हिंदी की उन्नति के खातिर
तन-मन से यदि होंगें हाजिर
उन्नति अपनी ही होगी
दुनियां सपनों सी ही होगी
रहे अँधेरा न कहीं धरा पर
आओ ऐसा दीप जलाएं
हिंदी में बोलें और गायें
निशदिन हिंदी दिवस मनाएं





6 टिप्‍पणियां:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

हिंदी का मान रखें ....

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत ख़ूबसूरत रचना बनी इस हिन्दी दिवस पर !

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ..यही जज़्बा रहना चाहिए

कविता रावत ने कहा…

...बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति
हिंदी दिवस की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएँ

raghav ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना

Amit Kumar ने कहा…

आओ ऐसा दीप जलाएं
हिंदी में बोलें और गायें
निशदिन हिंदी दिवस मनाएं

...बहुत सुन्दर प्रस्तुति...बधाई.