बुधवार, 5 सितंबर 2012

हिन्दी पखवाड़ा

हिन्दी में बोले और गायें
निशदिन 'हिन्दी दिवस मनाये
आओ हम खुद को पहचाने
अंग्रेजी संग हुए बेगाने
जिसे बोलते जीभ लचकती
अधरो पर मुस्कान न आये।
हिन्दी में बोले और गायें
निशदिन 'हिन्दी दिवस मनाये

'हिन्दी का आया पखवाड़ा
भागी इंगिलश देख अखाड़ा
भाव विखर कर गिरती जाती
हिन्दी के सम्मुख टिक न पाती
कर्णप्रिय लगती 'निज" भाषा
जन-जन में ये भाव जगाये
हिन्दी मे बोलें और गायें
निशदिन दिवस मनायें

हिन्दी की उन्नति की खातिर
तन-मन से यदि होगे हाजिर
उन्नति भी अपनी ही होगी
दुनिया सपनों सी ही होगी
रहे अंधेरा न कहीं धरा पर
आओ, ऐसा दीप जलायें
हिन्दी में बोले और गायें
निशदिन हिन्दी दिवस मनायें

1 टिप्पणी:

संजय भास्कर ने कहा…

सटीक विवेचन .... सुंदर प्रस्तुति ....