सोमवार, 3 जनवरी 2011

मेरा बचपन

अब मैंने भी सीखा पढ़ना ,
छोड़ दिया दीदी संग लड़ना

रोज सुबह उठकर मम्मा संग,
अपनी ढूँढू कापी
छोड़ी मैंने चाकलेट,
खाना छोड़ा टाफी
पीना सीखा दूध गरम
अब छोड़ दिया है रसना

अब मैंने भी सीखा पढ़ना ,
छोड़ दिया दीदी संग लड़ना

मैं भी अपने पापा के संग
अब रोज नहाता हूँ।
उससे पहले झटपट निशदिन
माॅर्निंग-वाक पे जाता हूँ।

खेल-खेल में हँस कर पढ़ना,
है अब दिनचर्या मेरी
दादी-दादा के संग रहना,
अब है परिचर्चा मेरी
मुझे डाँटते अब भैया,
खूब प्यार करे अब बहना।

अब मैंने भी सीखा पढ़ना ,
छोड़ दिया दीदी संग लड़ना

1 टिप्पणी:

Ram Shiv Murti Yadav ने कहा…

Sundar abhivyakti...badhai.