शनिवार, 31 जुलाई 2010

ईश्वर

देखा है लोगो को
मन्दिर , मस्जिद ,गुरूद्वारे एवं गिरजाघर में
"ईश्वर"को खोजते हुए,
मन्नतों के लिए दर-दर भटकते हुए
वे जानते हैं कि "ईश्वर" वहाँ नहीं मिलेगा
’फिर व्यर्थ क्यों खोजते हैं तुष्टि के लिए’
एक यक्ष प्रश्न ने सिर उठाया
फिर ”ईश्वर“ कहाँ मिलेगा ’
सोचते-सोचते चिन्तन आगोश में खो गया
अचानक अन्र्तमन के पट पर
चलचित्र की तरह कुछ पात्र उभरे
मन ने माना कि ये ही ”ईश्वर“ के रूप हैं
माँ , किसान , डाक्टर ,
गिरते को उठाने वाला ,
मरते को बचाने वाला ,
सबकी प्यास बुझाने वाला ,
सबकी भूख मिटाने वाला ,
भटके को राह दिखाने वाला ,
बिछडे़ को मिलवाने वाला ,
गुणगान योग्य है ऐसा गुणवान
यही सुपात्र की नजर में ”भगवान“ है ।

6 टिप्‍पणियां:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

jo hamare mann ko disha de, swar de---wahi bhagwaan hai

raghav ने कहा…

बहुत सुन्दर कविता..बधाई.

KK Yadava ने कहा…

बेहद प्रासंगिक कविता...आपने तो चक्षु-पट खोल दिए...गंभीर पड़ताल की जरुरत.

KK Yadava ने कहा…

बेहद प्रासंगिक कविता...आपने तो चक्षु-पट खोल दिए...गंभीर पड़ताल की जरुरत.

आशीष/ ASHISH ने कहा…

सही है! सहमत हूँ!
और कविता खूबसूरत है!

Ashish (Ashu) ने कहा…

बहुत खूब भाई..पर मेरे बिचार से ईश्वर के क्रम मे सर्वप्रथम स्थान मां का हॆ..उसके बाद किसान ऒर डाक्टर का