आज बदलते युग में
नेता से ज्यादा बेटा बदल रहा है
नेता तो कुर्सी के लिए
जान देने को तत्पर परन्तु
‘बिल्लो रानी’ कहे न कहे
आज का बेटा जान लेने के लिए
चलता है लेकर लाव-लश्कर
नेता जी को कुर्सी में ही
तीनों लोक नजर आते हैं
परन्तु आज के बेटे तो
जहाँ दिखी ‘‘ऐश’’
वहीं पसर जाते हैं
नेता जी को याद नही
‘जनता’ से किये वादे
पर आज बेटा ‘मंजनू’ बन
पूरे कर रहा है ‘लैला’ के इरादे
शुक्रवार, 18 मार्च 2011
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1 टिप्पणी:
लिखा तो अच्छा है आपने पर इशारा कौन है? नेता का बेटा या कोई भी बेटा
पाठकों पर अत्याचार ना करें ब्लोगर
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