चली चर्चा एक बार कवित्व पर
कि ‘कविता क्या होती है?
किसी ने कहा कि
‘कविता’ कवि का भाव है
‘कवि के विचारों का
क्रमात्मक बहाव है’
किसी ने सराहा कि
‘कवि अपने दर्द को
कागज पर उकेरता है’
अपने खुशी भरें पलो को
अंलकारों और रसों से संवार कर
लेखनी की उन्मत् चाल से
शब्दों को वाक्यों में पिरोकर
कागज पर सहेजता है
वह जो समाज में देखता है
उसे ही ढ़ालकर आइने में
समाज को आईना दिखाता है
कवि अपने कल्पना रूपी पंखो से
लेखनी की थिरकन पर
वहाँ पहुँच जाता है
वित्तीय समावेशन, डिजिटल नवाचार से ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स तक, भारतीय डाक सुदूर
क्षेत्रों तक निभा रहा अहम भूमिका- पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव
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भारतीय डाक विभाग अपनी दूरदर्शी कार्यशैली और ‘डाक सेवा-जन सेवा’ के मूल मंत्र
के साथ देश के कोने-कोने तक विश्वसनीय एवं सुलभ सेवाएँ पहुँचाने में निरंतर
अग्र...
16 घंटे पहले

3 टिप्पणियां:
..बहुत सुन्दर परिभाषित किया है आपने कवित्व को....आर सारांश में ये पक्तियों बेहद अच्छी लगी....
वह जो समाज में देखता है
उसे ही ढ़ालकर आइने में
समाज को आईना दिखाता है
कवि अपने कल्पना रूपी पंखो से
लेखनी की थिरकन पर
वहाँ पहुँच जाता है
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