जाने क्यों लोग ऐसा करते हैं
जिनको कहते हैं अपना
नित्य प्रति उन्हीं को दुख पहुँचाते है
वे जानते है कि जो,
आज हुआ है प्रचलित
वही भविष्य के जगमगाहट में
हो जायेगे विस्मृत
फिर भी न जाने क्यों
दोहराते है इतिहास
और कल के आगोश में
बन जाते है परिहास
घोर आश्चर्य है कि
करते हैं उपेक्षा उनकी
मात्र दो रोटी और कुछ बुंदे
भूख-प्यास है जिनकी
जिन्होंने चार-पाँच को,
अकेले है पाला
वही उन्हे नही दे पा रहे है
मात्र दो कौर निवाला
अब तो वे न आ रहे
है ‘‘बूँदो’’ के काम
जिनके लालन-पालन में
नहीं किया विश्राम
यहाँ सभी को याद है
‘‘श्री गीता’’ का ज्ञान
कर्मो के आधार पर
फल देता भगवान
फिर भी इस संदेश को
है जाते वे भूल
Postmaster General Krishna Kumar Yadav turns birthday into a green legacy :
49 years, 49 saplings
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भारतीय परंपरा में पेड़-पौधों को परमात्मा का प्रतीक मान कर उनकी पूजा का विधान
बनाया गया है। हमारी साँसें चलती रहें, इसके लिए ऑक्सीजन बेहद जरुरी है।
पर्याव...
2 हफ़्ते पहले

1 टिप्पणी:
Badhiya rahi..
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शब्द सृजन की ओर पर पढ़ें- "लौट रही है ईस्ट इण्डिया कंपनी".
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