आवाज कुछ मुख से निकलती ,इससे पहले
फद्फदाकर पंख पंछी उड़ चला था
रात दिन जो कोसते उसको रहे थे
कह चले "इन्सान " वो कितना भला था
आज से पहले न था रब को पुकारा
ओउर देखा भी न था मन्दिर का द्वारा
गुरुद्वारे जा के भी न माथा टेका
घंट -नाद चर्च का भी न सुना था
आज पंछी उड़ चला थल छोड़कर जो
"भारती" मन्दिर न मस्जिद कर्बला था
Postmaster General Krishna Kumar Yadav turns birthday into a green legacy :
49 years, 49 saplings
-
भारतीय परंपरा में पेड़-पौधों को परमात्मा का प्रतीक मान कर उनकी पूजा का विधान
बनाया गया है। हमारी साँसें चलती रहें, इसके लिए ऑक्सीजन बेहद जरुरी है।
पर्याव...
2 हफ़्ते पहले

1 टिप्पणी:
बहुत ही भावपूर्ण निशब्द कर देने वाली रचना . गहरे भाव.
एक टिप्पणी भेजें