हिन्दी में बोले और गायें
निशदिन 'हिन्दी दिवस मनाये
आओ हम खुद को पहचाने
अंग्रेजी संग हुए बेगाने
जिसे बोलते जीभ लचकती
अधरो पर मुस्कान न आये।
हिन्दी में बोले और गायें
निशदिन 'हिन्दी दिवस मनाये
'हिन्दी का आया पखवाड़ा
भागी इंगिलश देख अखाड़ा
भाव विखर कर गिरती जाती
हिन्दी के सम्मुख टिक न पाती
कर्णप्रिय लगती 'निज" भाषा
जन-जन में ये भाव जगाये
हिन्दी मे बोलें और गायें
निशदिन दिवस मनायें
हिन्दी की उन्नति की खातिर
तन-मन से यदि होगे हाजिर
उन्नति भी अपनी ही होगी
दुनिया सपनों सी ही होगी
रहे अंधेरा न कहीं धरा पर
आओ, ऐसा दीप जलायें
हिन्दी में बोले और गायें
निशदिन हिन्दी दिवस मनायें
स्वयं घोषित और स्वयं प्रचारित शुद्रो और इनके हितैषियों से संवाद का एक
प्रयास।
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स्वयं घोषित और स्वयं प्रचारित शुद्रो और इनके हितैषियों से संवाद का एक
प्रयास।
आजकल हमारे देश में दलहित भावना बहुत फल फूल रही है।वर्तमान प्रोमोशनल हाई
प...
2 दिन पहले

1 टिप्पणी:
सटीक विवेचन .... सुंदर प्रस्तुति ....
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