-गरीब लड़की-
सामाजिक दहलीज पर
अपने घर के कोने की तरह
रह रह कर ठिठक जाती है
एक गरीब की लड़की
उसी समाज में जहाँ
कम एवं छोटे वस्त्र पहनना
नित्य नया फैशन माना जाता है
वहीँ गरीब की लड़की
अपने फटे वस्त्रों में
अपनी लाज छुपाने के लिए
बार बार सिमट जाती है।
उसे महसूस होत है
उन निगाहों की चुभन
जो बेहयाई से झांकती हैं
सूक्ष्म छिद्रों से उसका तन
और वह पी जाती है पीड़ा
मसोसकर अपना मन
स्वयं घोषित और स्वयं प्रचारित शुद्रो और इनके हितैषियों से संवाद का एक
प्रयास।
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स्वयं घोषित और स्वयं प्रचारित शुद्रो और इनके हितैषियों से संवाद का एक
प्रयास।
आजकल हमारे देश में दलहित भावना बहुत फल फूल रही है।वर्तमान प्रोमोशनल हाई
प...
1 हफ़्ते पहले

2 टिप्पणियां:
sach gareebi se badhkar koi abhishap nahi...
bahut badiya saarthak prastuti ke liye aabhar!..
Blog per aur rachnay bhi dekhen.
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