लाल मेरे माना तुझे जन्म न दिया
लेकिन तुझे मैंने अपना नाम दिया है
पाल पोश ‘माँ ‘ ने तुझे है बड़ा किया
हर कदम पर मैंने भी तो साथ दिया है
माना कि नौ माह, माँ ‘ का प्यार बड़ा है
मैंने भी खुद से ज्यादा तुझे प्यार किया है
अगुली पकड़ के माँ ने तुझे चलना सिखाया है
डगमगाये कदम तो मैंने थाम लिया है
मुसीबत में माँ ने तुझे अंक भर लिया
मैंने भी मुसीबत को नाकाम किया है।
नीट संकट और परीक्षा-व्यवस्था की विश्वसनीयता
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भारत की प्रतियोगी परीक्षा-व्यवस्था केवल प्रवेश की प्रक्रिया नहीं, बल्कि
सामाजिक न्याय, अवसर और प्रतिभा-परीक्षण का आधार है। जब राष्ट्रीय पात्रता सह
प्रवेश...
1 हफ़्ते पहले

2 टिप्पणियां:
बिल्कुल सही कहा………………मां के साथ साथ पिता के योगदान को नकारा नही जा सकता।
इसी पर मैने भी कुछ लिखा है यहाँ पढियेगा।
http://vandana-zindagi.blogspot.com
खूबसूरत अभिव्यक्तियाँ...बधाई.
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