लाल मेरे माना तुझे जन्म न दिया
लेकिन तुझे मैंने अपना नाम दिया है
पाल पोश ‘माँ ‘ ने तुझे है बड़ा किया
हर कदम पर मैंने भी तो साथ दिया है
माना कि नौ माह, माँ ‘ का प्यार बड़ा है
मैंने भी खुद से ज्यादा तुझे प्यार किया है
अगुली पकड़ के माँ ने तुझे चलना सिखाया है
डगमगाये कदम तो मैंने थाम लिया है
मुसीबत में माँ ने तुझे अंक भर लिया
मैंने भी मुसीबत को नाकाम किया है।
दुनिया की पहली हवाई डाक सेवा ने पूरा किये 115 वर्ष, प्रयाग कुंभ मेले के
दौरान 18 फरवरी 1911 को 6,500 पत्रों को लेकर उड़ा था विमान - पोस्टमास्टर जनरल
कृष्ण कुमार यादव
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डाक सेवाओं ने पूरी दुनिया में एक लम्बा सफर तय किया है। भारत को यह सौभाग्य
प्राप्त है कि दुनिया की पहली हवाई डाक सेवा यहीं से आरम्भ हुई। उत्तर गुजरात
परिक...
1 दिन पहले

2 टिप्पणियां:
बिल्कुल सही कहा………………मां के साथ साथ पिता के योगदान को नकारा नही जा सकता।
इसी पर मैने भी कुछ लिखा है यहाँ पढियेगा।
http://vandana-zindagi.blogspot.com
खूबसूरत अभिव्यक्तियाँ...बधाई.
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