हर रात की सुबह होगी जरूर
फिर भी तडप-तड़पकर
क्यों हो जीने पर मजबूर
कभी तो महकेंगें, हर क्षण
तुम्हारी जीवन की बगिया के
खेलेंगी खुशियाँ
तुम्हारे दामन में भरपूर
और आयेंगे तुम्हारे द्वार
ढेरों खुशियों के उपहार
और तुम्हारे सारे दुःख
होगें तुमसे दूर !!!
वित्तीय समावेशन, डिजिटल नवाचार से ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स तक, भारतीय डाक सुदूर
क्षेत्रों तक निभा रहा अहम भूमिका- पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव
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भारतीय डाक विभाग अपनी दूरदर्शी कार्यशैली और ‘डाक सेवा-जन सेवा’ के मूल मंत्र
के साथ देश के कोने-कोने तक विश्वसनीय एवं सुलभ सेवाएँ पहुँचाने में निरंतर
अग्र...
16 घंटे पहले

7 टिप्पणियां:
Aap ki pahli kavita padne ko mili. Khusi hue. Bhut khoob.
"हर रात की सुबह होगी जरूर
फिर भी तडप-तड़पकर
क्यों हो जीने पर मजबूर"
यही तो त्रासदी है मनुष्य के सोंच और जीवन शैली की.
सुधार में सहयोग देने की हिमाकत करते नहीं, शार्टकट से धनी बनाने की ख्वाहिशे जरूर पाल लेते हैं .......
सुन्दर और गहरे भाव से भरी आपकी यह प्रस्तुति पसंद आयी.
आभार.
Sundar abhivyakti..badhai !!
Wah....khub likha..Congts.
आज़ादी की 62वीं सालगिरह की हार्दिक शुभकामनाएं। इस सुअवसर पर मेरे ब्लोग की प्रथम वर्षगांठ है। आप लोगों के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष मिले सहयोग एवं प्रोत्साहन के लिए मैं आपकी आभारी हूं। प्रथम वर्षगांठ पर मेरे ब्लोग पर पधार मुझे कृतार्थ करें। शुभ कामनाओं के साथ-
रचना गौड़ ‘भारती’
Nice one.
पाखी की दुनिया में "बाइकिंग विद् पाखी" http://pakhi-akshita.blogspot.com/
शुभकामनाएं
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