जन्म लेने से पहले ही
मार दी जाती है ‘बाला’
न रहम उसकी खातिर
न उसके पथ में ‘उजाला’
अगर बच गयी
यदि जन्म ले लिया तो
जकड़ दी जाती
फौलादी बेडियों में
दबकर, सिमट कर
है जीना उसकी फितरत
बसर कर रही है
कई भेडि़यों में
ले आवलम्बन अभी भी
सदा जी रही है
कटु, विष के प्याले
सदा पी रही है
कभी माता-पिता तो
कभी पति की दासी
है ‘ममता’ का सागर
रहती फिर भी है प्यासी
नहीं सुख का आंचल
”भारती“है गहरी उदासी
स्वयं घोषित और स्वयं प्रचारित शुद्रो और इनके हितैषियों से संवाद का एक
प्रयास।
-
स्वयं घोषित और स्वयं प्रचारित शुद्रो और इनके हितैषियों से संवाद का एक
प्रयास।
आजकल हमारे देश में दलहित भावना बहुत फल फूल रही है।वर्तमान प्रोमोशनल हाई
प...
4 दिन पहले
